[हरिभूमि के आज (6/30/10) के संस्करण में मेरा व्यंग्य]
क्या ये सच में “महिला सशक्तिकरण” है… या फिर राजनीति?
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क्या ये सच में “महिला सशक्तिकरण” है… या फिर राजनीति की एक ऐसी चाल, जिसमें
महिलाओं का नाम लेकर खेल कुछ और ही खेला जा रहा है?
आज संसद में जो बहस चल रही है...







