[हरिभूमि के आज (6/30/10) के संस्करण में मेरा व्यंग्य]
थक गए हो?
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अगर आज तुम थके हुए हो…
अगर तुम्हें लग रहा है कि अब और नहीं हो पाएगा…
अगर तुम अकेले में मुस्कुरा तो देते हो,
लेकिन अंदर से टूट चुके हो…
तो
*ये विम...


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