"हमारी अंजुमन" के लिए लिखा मेरा लेख दैनिक जागरण ने दिनांक 10 जुलाई को अपने राष्ट्रिय संस्करण में "आस्था का सवाल और धर्म परिर्वतन" शीर्षक के साथ प्रष्ट नंबर 9 (विमर्श) के कॉलम "फिर से" पर प्रकाशित किया.
मुश्किल के बाद आसानी ज़रूर आती है
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दोस्तों…
ज़िंदगी में जब मुश्किलें आती हैं ना… तो इंसान को लगता है कि बस अब सब खत्म
हो गया।
रास्ते बंद हो गए…
उम्मीदें टूट गईं…
और शायद अब आगे कुछ अच्छ...


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